हाय, ये कैसी मोहब्बत


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हमरे एक नमाजी मित्र हैं इस्लाम के मामले में कुछ फँसने पर उन्हीं से हम फ़तवा या मशविरा लेते हैं। अभी पाकिस्तान से जुड़ा एक मामला है, जिसने इस्लाम को खतरे में डाल दिया है। न जी, कब्रिस्तानों और जनाजों में हो रहे बम धमाकों की बात नहीं है, मरना तो सबको है, चाहे जैसे। जब फैसला क़यामत की रात को ही होना है, तो मरने से क्या डरना, बात जीने की है।

पाकिस्तान की दो जनानियों ने लन्दन में दो साल की कोर्टशिप के बाद कोर्ट मैरिज कर ली। निकाह तो उनका हो नहीं सकता, मजहब इसकी इजाज़त ही नहीं देता।

हमने अपने मित्र से इस बारे में पूछा तो मियाँ जी एक बहुत लम्बी साँस लेते हुए बोले की बुत बनाने की इजाजत इस्लाम में नहीं है, हिन्दू भाई तो अपना कन्फ्यूजन मिटाने के लिए खजुराहो जा सके हैं। माशा अल्लाह क्या तराशा है मंदिर की दीवारों पर, एक से एक नक्काशी है, जिसमें तमाम सवालों के जवाब मिल जाते हैं। आदमी औरत और चौपाये सबके साथ जिस्मानी रिश्तों को जिस तफ्शील से उकेरा है कि आप की रूह भी आह भरे। अगर भगवान के दर्शन को गए हैं तो गर्भ गृह से पहले बाहरी दीवारें ही सनातनी लोगों को जन्नत की सैर कराती हैं। भाई जान ने अपने मजहब की आसमानी किताब का हवाला देते हुए कहा कि एक नबी हुए रहे जो देखेने में बहुत खुबसूरत हुआ करते थे और वो भी उस ज़माने में थे, जब लौंडे रखने का बड़ा चलन था।

हमने उनके शब्द पर आपत्ति की तो बोले कि यही शब्द आजतक चलन में है। हाँ, नबी ने इस बुराई का बड़ा विरोध किया और हमेशा ऐसे लोगों से लड़ते रहे पर एक दफे क्या हुआ कि जनाब इसी सेंसटिव मुद्दे पर तकरीर दे रहे थे और बता रहे थे की आदम जात का नाश हो जायेगा, अगर ऐसे ही ये बीमारी बढ़ती गयी तो। हुजूर प्रवचन दे रहे थे और कुछ आतताई उन्हीं की पाकीज़गी पर नज़र गड़ाए बैठे थे, एकाएक कुछ लोगों ने गलत नजर के साथ दौड़ा ही लिया की बड़ा बोलता है आज सबक सिखा ही दिया जाय। नबी ख़ुदा का नाम लेकर भागने लगे, पर ख़ुदा तो नहीं कुछ नेक बन्दों ने इज्जत लुटने से बचाई। तब नबी ने बोला की इन आततायियों को दोज़ख भी नसीब नहीं होगा, जिसके बदले में ये अपनी खुद की दुनिया बनायेंगे और उसी में जल कर ख़ाक हो जायेंगे।

ये तो आदमी के आदमी से प्यार की बात रही, जनानियों के जिस्मानी रिश्तों पर नबी भी खामोश रहे और खामोश है वो किताब, जिससे सब अँधेरे में रोशनी तलाशते हैं। आप को अगर याद हो तो इस्मत चुगताई ने लिहाफ के अन्दर की हलचल पर कुछ लिखा था। एक खवातीन का ऐसा लिखना, वो भी तब जब इस मुद्दे पर आम इन्सान न खुल कर बोल सके, न सुन सके, अपने आप में एक बड़ी घटना थी, जो मजहब के लिए दुर्घटना थी। बोलना -सुनना तो अभी भी अपराध ही है, भले ही साईकोलोजी कुछ और हो। भावनाएं आहत हो जाती हैं। पर आहत हों तो हों और मजहब जाये तेल लेने। पाकिस्तान की रेहाना कौसर और सोबिया कमर ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इवेन ख़ुदा भी आसमान से जब जमीं पर देखता होगा, इन्हें किस दिन बनाया, सोचता होगा। इंग्लैंड के बर्मिंघम में हेल्थ केयर मैनेजमेंट की क्लास में दोनों की मुलाकात होती है और फिर मोहब्बत। दोनों ने एक दूसरे के साथ रहने की कसम खायी। सिटी काउन्सिल के ऑफिस में दोनों शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए के लिए पहुंचती हैं। इसाई लोगों के लिए तो अब ‘चर्च फॉर गे’ की भी बात होने लगी है और पादरी लोग खुद भी, हम गे कि तुम गे की बात करने लगे हैं।

कुछ दिनों पहले तक चर्च भी ऐसे लोगों को जो ‘स्ट्रेट’ नहीं हैं, काफ़िर ही मानता था. पर अब पोप जी कह दिया है कि सभी हैवेन जाने के हकदार हैं, चाहे स्ट्रेट हों या तिरछे। पर सिटी काउन्सिल के अफसरों ने मामला इस्लाम का होने के नाते हाथ जोड़ लिए, वैसे भी आजकल इंग्लैंड में आजकल ईसा - मूसा का गृहयुद्ध टाईप का छिड़ा हुआ है। पर अगर आप टेढ़े हो जाते हैं, तो आपके सपोर्ट में भी ढेर सारे तिरछे -औने -पौने एक्टिविस्ट जुट जायेंगे। यही हुआ इन दो प्रेमिकाओं के लिए भी। बालिग हैं, कमासुत हैं, तो शादी क्यों नहीं कर सकतीं। प्यार एक रूहानी एहसास का नाम है, उसे जिस्मानी रिश्तों से जोड़ने वालों की हाय -हाय के साथ भीड़ जुटी और इस्लाम के इतिहास में पहली बार दो सच्ची मुसलमानियों की रजिस्टर्ड शादी हो गयी। कानूनन इंग्लैंड निकाह को नहीं मानता, शादी रजिस्टर्ड होनी चाहिए। और इस्लाम जनानियों की कागजी शादी को ख़ारिज करता है, क्योंकि इस्लाम में होमोसेक्सुअलिटी का जिक्र ही नहीं है। ऐसा करने वाला खुद ब खुद मजहब से ख़ारिज हो जाता है। कोई भी मौलवी रूहानी निकाह कराने के लिए तैयार नहीं हो सकता, वरना उसकी भी दुकान बंद हो जाएगी। ऐसे में फिर इस स्पेशल नसल वालों को बेधर्मी बनना ही पड़ेगा और कागजी शादी के आलावा कोई चारा ही नहीं। अगर इनको भी ख़ुदा ने ही बनाया है तो इनका हिसाब भी वही करेगा दिक्कत की कोई बात नहीं। उछलते रहें मुल्ला और काज़ी, क्या कर लेंगे, जब दोनों रूह हैं राजी। बड़े नासमझ हैं, वो जो मोहब्बत को जिस्मानी रिश्तों से जोड़ कर देखा करे हैं, कुछ यूँ ही तो लिखा है मोहब्बत की किताबों में। पर लिखने वालों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा आएगा जब आदमी -आदमी से और औरत -औरत से इस कदर मोहब्बत कर बैठेंगे कि आदम हव्वा की कहानी भी हवा हो जाएगी।

इस्लामी मुल्कों में ऐसा करना कानून की निगाह में गुनाह है, सो पाकिस्तान में भी ये एक भारी अपराध है। वहाँ माँग की जा रही है कि इन दोनों को पाकिस्तान वापस लाया जाये और दोनों को पत्थर मार कर मजहब और मुल्क की कटी नाक को जोड़ा जा सके। उधर, स्टूडेंट वीजा पर इंग्लैण्ड गयी इन दोनों की लाईफ पर वहां भी खतरा है। अभी कुछ दिन पहले ही एक जेहादी ने एक ब्रिटिश सिपाही की मुण्डी काट दी थी, उस जेहादी का उस्ताद अभी लन्दन में ही है और फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन के तहत बीबीसी और दूसरे चैनलों और अख़बारों पर प्रवचन दे रहा है। उसके गुर्गों से भी रेहाना और सोबिया की जान को खतरा है, जिसको देखते हुए हुकूमते बिरतानिया ने दोनों को नागरिकता और पूरी सुरक्षा देने का वादा किया है, ताकि मोहब्बत की जिंदाबाद कायम रहे। कराओ यार मोहब्बत,आदमी को आदमी से प्यार करना ही चाहिए पर इस कदर मोहब्बत?