कांग्रेस पार्टी झूठ की राजनीति को मानक बना रही है!

दुनिया के किसी भी सभ्य समाज में झूठ बोलने को चारित्रिक पतन के तौर पर देखा जाता है। झूठ को मक्कारी से जोड़कर देखने की परंपरा रही है। असल में ये दोनों शब्द एक-दूसरे के पूरक हैं। इन दिनों यही कुछ कांग्रेस पार्टी में चल रहा है। एक जमाने में सत्य और सदाचार का पाठ पढ़ाने वाली कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने के लिए झूठ का सहारा ले रही है। ताजा मामला राफेल से जुड़ा है। कैंसर से जूझ रहे गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया था कि पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को राफेल की नई डील के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, अब राहुल गांधी के झूठ की गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बखिया उघेड़ दी है। पर्रिकर ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि वह बीमारी पर हालचाल लेने के बहाने निम्न स्तर की राजनीति कर रहे हैं। पर्रिकर ने कहा है कि राहुल गांधी से 5 मिनट की भेंट में न तो ‘राफेल’ का जिक्र हुआ और न ही मैंने राफेल संबंधी कोई चर्चा हुई।

पर्रिकर का पत्र आप यहां पढ़ सकते हैं।

झूठ को सौ बार बोलें, तो भी यह सत्य नहीं होता। राहुल गांधी के झूठ की कलई खुल चुकी है। क्या आपको भी लगता है कि कांग्रेस पार्टी झूठ की राजनीति को भारतीय समाज में स्थापित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है, साथ ही झूठ पर झूठ राहुल गांधी का चारित्रिक पतन है?

सत्यवादी पुरुष नारियल फल के समान बाहर से कठोर और भीतर से कोमल दिखाई परते हैं।असत्यवादी तो बैर फल जैसे बाहर से ही कोमल और अंदर से बहोत कठोर दिखाई परते हैं।।

राहुल गान्धी बैर जैसे हैं , जो की कभी सच्ची राजनीति नहीं कर सकते क्योंकि बैर के बीज जैसे ये अंदर से बहुत कठोर हैं, जिसको राजनीति का सच्चा ज्ञान है वही सच्ची राजनीति कर सकता है, हमें लगता है कि वो राहुल गान्धी में नहीं हैं।।