विशेषः अक्कड़-बक्कड़


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मोदी कई बार मुख्यमंत्री हो चुके हैं, इसलिए कुछ लोग चाहते थे कि अब उनको प्रधानमंत्री बना दिया जाय। राजनीति से दूर रहने वालों का मानना है कि गुजराती चेतेश्वर पुजारा और रविन्द्र जडेजा के दमदार प्रदर्शन के पीछे भी मोदी का हाथ है। कहा जाता है कि गुजरात में सब कुछ एक आदमी के कब्जे में है, वहां का क्रिकेट संघ भी इसका अपवाद नहीं, जिसके सर्वे - सर्वा भी नमो भाई ही हैं। क्रिकेट हमारे देश में धर्म की तरह है,जैसे झाल मजीरा बजते ही सब दुःख दर्द दूर हो जाते हैं वैसे ही जब करोड़पति खिलाड़ी मैदान में कमाने उतरते हैं तो भूखे -नंगे लोग,बम ब्लास्ट से आहत लोग सब कुछ भूल कर छक्का -छक्का की ध्वनि में लीन हो जाते हैं। अभी हमारा ये धर्म खतरे में पड़ गया था। इंग्लैण्ड में पिटे थे।आस्ट्रेलिया में पिटे थे,और तो और अंग्रेज हमारी टर्निंग पिचों पर हमको बुरी तरह नचा के गए थे।

फ्रंट फुट पर खड़े नामो

ऐसा बुरा हाल हुआ कि टीम ही बदल डालने की नौबत आ गई। वो तो भला हो कोई दिखा नहीं, इसलिए धोनी बच गया। बचता क्यों नहीं, झारखंडी बहुत दिलेर होते हैं। माफिया, नक्सली, सरकार, गरीबी किसी को भी आदमी बना देंगे। धोनी की किस्मत सामने आ गई। फिर आस्ट्रेलिया,अबकी ऐसी की फ़ौज में खाली सेनापति, बाकी काठ के घोड़े। कभी देखी है ऐसी फ़ौज। चले आये सीधे क्ले कोर्ट पर खेलने। कहाँ कंगारू घास के मैदान में कुलांचे भरते हैं और कहाँ धूल के बवंडर में फंस गए। धूल में आप उछाल नहीं मार सकते। आँख में घुस जाएगी। वहां लोटना पड़ता है। ऐसे में तेज़ भागने वालों को जरूरत पड़ी स्पिनर की। वार्न के जाने के बाद ये डिपार्टमेंट खाली पड़ा है। न जाने कितने आये और गए, पर एक क्रिकेट मैदान में घास काटने वाले स्टाफ शाम को खेलते थे, जिसमें एक नाथन लोयन भी थे। उनकी कुछ घूमती गेंदों को देख टीम में ले लिया गया। जी हाँ, ये सच है। भारत में ऐसा हो सकता है? खैर वो टीम भारत आई और धोनी के सामने पड़ गए लोयन। साथ में गुजराती रन मशीन पुजारा ने जम कर पेरा और राकस्टार जडेजा ने जलवा दिखाया, उसके बाद जो हुआ वो मैच देखने वाले और अखबार में खेल समाचार पढ़ने वाले सब जानते हैं। अगर नहीं जानते, तो जानना चाहिए, क्योंकि हमारे देश में क्रिकेट और राजनीति अलग नहीं है। शायद आप ने नहीं देखा हो, देखते भी कैसे आप तो नेट पर रहते हैं।

आस्ट्रेलिया की टीम मोहाली पहुंची, तो एक तेज़ तर्रार रिपोर्टर ने माइकल क्लार्क को घेर लिया। पिच की हालत और खिलाडियों के फार्म पर बात करते-करते क्लार्क झल्ला उठे। पहले जितनी गोरी टीमें भारत आती थीं, उनमें अधिकांश खिलाड़ियों का पेट खराब हो जाता था। अबकी क्लार्क का पेट खराब है। जिस स्पीड से उनकी टीम के खिलाड़ी पिच पर से भागते दिखे, कुछ एक्सपर्ट सलाह दे रहें हैं कि दबाव यानी प्रेशर में खड़े होना सीखना चाहिए। भले ही कंगारुओं को एडल्ट डाईपर लगाना पड़े। हाँ, तो रिपोर्टर ने आखिरी सवाल क्लार्क से पूछा ‘मोदी और राहुल में कौन जीतेगा?’ चकराए क्लार्क ने पूछा कि वो क्या होता है, तो रिपोर्टर का जवाब था कि ऊपर से आदेश है कि हर इन्टरव्यू के अंत में ये सवाल पूछना जरूरी है।

अभी भी आप नहीं समझे कि मोदी को प्रधानमंत्री क्यों बनाना चाहिए। भाई लेकिन अपने देश में एक राज्य है त्रिपुरा। वहां भी माणिक सरकार चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं। कामरेड हैं। पांच हज़ार अपने पास रख कर बाकी पार्टी फंड में दे देते हैं। शाम को झोला लेकर तरकारी लेने जाते हैं। हाँ, सिगरेट खुले आम पीते हैं, लेकिन ये नहीं पता कि क्रिकेट में दिलचस्पी है की नहीं। इसलिए मोदी की दावेदारी तगड़ी है।