अकरम नहीं करेंगे सुष्मिता से शादी


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जेंटलमैन गेम के हैण्डसम खिलाड़ी वसीम अकरम ने कहा है कि इस हफ्ते हिंदुस्तानी मीडिया ने उनको जितनी तकलीफ दी है, उतनी तीस साल की उम्र में हो जाने वाली डाईबिटीज ने नहीं दिया। उन्होंने साफ किया कि उनका पूर्व ब्रह्माण्ड सुंदरी के साथ कोई अफेयर नहीं है। ऐसे में शादी की बात बेबुनियाद है। उनका मानना है कि कोलकाता नाईट राईडर और उसके मालिक शाहरुख खान के शुभचिन्तक पत्रकारों ने ऐसी अफवाह उड़ाई है, ताकि बंगाल में चल रहे बवाल से लोगों का ध्यान कहीं और मोड़ा जा सके। चूँकि अकरम आईपीएल की शुरुआत से ही कोलकाता टीम के चीफ मेंटर रहे हैं और उनके निर्देशन में टीम पिछली बार चैम्पियन बनी थी। इसलिए हर बंगाली अकरम से प्यार करने लगा था। अपने स्वाभिमान के लिए धोती कुर्ता फाड़ के भी सड़क पर लोटने वाले भद्रजन चाहते थे कि अकरम को बंगाल का दूत यानि अम्बेसडर बना दिया जाय, क्योंकि लेफ्ट द्वारा दक्खिन लगा दिए स्वाभिमान को कोलकाता की किरकिट टीम ने वापस पटरी पर पहुँचाया था। हालांकि, जब दीदी को बताया गया कि हम किसी विदेशी नागरिक को ये सम्मान नहीं दे सकते, तब दुःखी मन से शाहरुख खान को राज्य का ब्रांड अम्बेसडर बनाया गया।

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कौन झेले ये झमेला

ऐसे में अकरम का इस साल कोलकाता की टीम को छोड़ देना बहुत से लोगों को दुःखी कर गया। पिछले वर्ष खुद दीदी ने इडेन गार्डन में लाखों लोगों के सामने अकरम को शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया था। वही दीदी, जिनका मूड आ जाए तो प्रधानमंत्री को भी मिलने का समय नहीं देती हैं। खुद तमाशा दिखाने में माहिर हैं, लेकिन तमाशा किरकिट को भी बहुत भाव देती हैं, क्योंकि उनको भी पता है कि इडेन गार्डन में तमाशा शुरू होते ही सीपीएम और तृणमूल, दोनों दलों के लड़ाके एक हो जाते हैं और कांग्रेस भी शांत हो जाती है, क्योंकि इस सर्कस की रिंग मास्टर वही है।

बताया जाता है कि खुद अकरम ने भी अपने आप को एक बंगाली भद्र मानुष के रूप में ढाल लिया था, क्योंकि महान खिलाड़ियों की ये खूबी होती है कि वो मौसम और परिस्थितियों के अनुरूप ही खेलते हैं। इसके अलावा उनकी खेल जगत में बहुत ही साफ सुथरी छवि है। अपने देश के कुछ अन्य खिलाड़ियों की तरह उनके साथ किसी विवाद का साया नहीं चलता। ऐसे में कहा जा रहा है पूर्व ब्रह्मांड सुंदरी सुष्मिता सेन का दिल अकरम पर आ गया। यूँ भी सुल का दिल पहले आधा दर्जन लोगों पर डीपली आ चुका है।

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सबसे पहले उनका दिल लेखक निर्देशक विक्रम भट्ट पर आया। मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने मंच से ये घोषणा की थी कि ये ताज मिलने पर वो अपनी रीच का इस्तेमाल समाज सेवा के लिए करेंगी। ऐसी हस्तियों की समाज सेवा का मतलब होता है कि प्रतियोगिता के दौरान अलग अलग चरणों में भाग्यशाली जजों के सामने जिन कलाओं का प्रदर्शन किया है अब वो रुपहले परदे पर आम समाज के लिए भी किया जाएगा। इस सेवा के लिए शुष्मिता ने भट्ट कैम्प के विक्रम के दिल में जगह बनाने में सफलता पायी, लेकिन जल्दी ही उनको लगने लगा कि ये बिना डाई किये बालों वाला, कुछ अधेड़ सा बन्दा, कमसिन मिस यूनिवर्स के साथ जमता नहीं। इसलिए तलाश हुई किसी हॉट मेल की। और दिल जा पहुंचा सबीर भाटिया के पास। वही सबीर भाटिया जिन्होंने इलेक्ट्रानिक चिट्ठी -पत्री वाली साईट हॉट मेल बना कर दुनिया भर में नाम और अकूत दाम कमाया था। सबीर को बम्बईया मीडिया ने भी खूब एक्सपोजर दिया, लेकिन तब, जब उन्होंने सुष्मिता को साढ़े दस करोड़ रुपये की अंगूठी पहनाई। दुनिया भर के एक्सपर्ट बताते हैं कि ज्यादातर समय कंप्यूटर पर बिताने वालों का पारिवारिक जीवन कलह से भर जाता है। साथ ही अपने लैप पर रख कर, लैपटॉप अधिक समय तक इस्तेमाल किया जाय तो नपुंशक हो जाने का भी खतरा रहता है। साथ ही सिलिकन वैली के एटिकेट भी, नई दुनिया में पहला कदम रखने वाली सुंदरी को रूखे से लगे, इसलिए दिल को तलाश हुई एडवेंचर की।

वापस बम्बई में एक एडवेंचरस हरियाणवी मुन्डा मिल भी गया, रणदीप हूडा के रूप में। सबीर की अंगूठी वापस की गई और ब्रह्मांड सुंदरी दिखने लगी जट्ट के साथ। आखिर लाईफ भी तो दुबारा नहीं मिलती। पर जल्दी ही ये बंगाली-हरियाणवी खिचड़ी ठंढी पड़ने लगी। एक हरियाणवी को झेल चुकी पूजा भट्ट ने सुस को यहाँ से उबारा। पर दिल को आना ही था, क्या करता, कोई नहीं दिखा तो इवेंट मैनेजर बँटी पर आ गया। पर अपने धंधे के चक्कर में बँटी को कई दूसरे लोगों को भी मैनेज करना था। लाजिमी था की सुंदरी कहती कि ए दिल कहीं और चल, फिर तो ताबड़तोड़ मोहब्बत का दौर चला। कभी नए लेखक के साथ तो कभी असिस्टेंट डायरेक्टर के साथ, सुष्मिता ने बॉलीवुड में प्यार की नई परिभाषा लिख दी। लोग गिनती भूल गए, ऐसे में आ गए वसीम अकरम भाई।

सुष्मिता को ये समझ में आया कि ये बन्दा भरोसे के काबिल है, इसमें कोई दो राय नहीं। अकरम चाहे मैदान में रहे हों या मैदान के बाहर, हमेशा भरोसेमंद रहे हैं। लगभग चार साल पहले पत्नि की मौत के बाद से सिंगल हैं। एक फाईटर खिलाड़ी होने के नाते अपने दोनों बेटों का नामकरण भी दो महान फाईटरों अकबर और तैमूर के नाम पर किया है। पर ऐसे नहीं हैं कि किसी बम्बईया से शादी कर लें। अल ज़ज़ीरा को दिए गए इण्टरव्यू में उन्होंने कहा कि कुछ समय बंगाल में बिताने के चलते उनके बारे में ऐसी अफवाह फैलाई जा रही है, क्योंकि सुस ने एक शो में मेरे साथ रैम्प पर चलने के बाद कहा था कि उनकी फाईनल शादी किसी ऐसे बन्दे से होगी, जिसे बंगाली एटिकेट्स की समझ हो और जो ग्लोबल विजन रखता हो।

उन्होंने कहा की उनकी मरहूम बीबी से इतनी मोहब्बत थी और है कि उसी के कहने पर मैंने कराची में दस हजार स्क्वायर फुट का बंगला बनवाया है। बीबी के कहने पर ही मैं अपने मुल्क में हूँ, नहीं तो जब वकार युनुस भाई आस्ट्रेलिया सेटल हो रहे थे, तो मुझे भी ऑफर किया था। उन्होंने कहा कि वो अपने उस्ताद इमरान खान की तरह पाकिस्तान में ही रहेंगे और अपने बूढ़े अब्बा जान को तकलीफ न पहुंचे, इसलिए एक्के-दुक्के हिंदुस्तानी न्यूज़ चैनल, जो घर में आते हैं कटवा देंगे, ताकि घर में भी अफवाहों का बसेरा न हो जाए।

इस मसले पर जब तेंदुलकर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि घड़ी के विज्ञापन में उनकी मुलाकात सुष्मिता से हुई है। अगर शादी होती है तो दोनों मुल्कों की कुछ इंडस्ट्री के लिए ठीक रहेगा। एक कपल के रूप में ढेर सारे विज्ञापन इस जोड़ी के पास आ जाएंगे, लेकिन सुष्मिता को ये लिखित में ले लेना चाहिए कि उसके साथ पाकिस्तान में वैसा सलूक नहीं हो जैसा सानिया मिर्ज़ा के साथ हुआ। शोएब और सानिया अभी हैदराबाद में ही थे और पाकिस्तान में ‘सानिया भाभी गुटका’ लाँच हो गया। ऐसे प्रोडक्ट्स से ब्राण्ड इमेज पर असर पड़ता है। सचिन ने ये भी कहा कि वसीम भाई की तरह सुष्मिता का दिल भी बहुत ऊँचा है, मैं तो उनके कमर तक ही पहुँच पाता हूँ।

इस बारे में जब बंगाल टाईगर कहे जाने वाले सौरव गांगुली से बात की गयी तो उन्होंने कहा की ये सब-काँटीनेन्ट की घटिया पिचों का कमाल है, कोई भी गेंद किधर भी घूम सकती है। वैसे मैंने तो अकरम भाई की गेंदों को जितना खेला है, उससे ज्यादा डक किया है, लेकिन चूँकि इसमें बंगाल की बेटी का सवाल है तो मैं चुप ही रहूँगा, क्योंकि खेल अकादमी के नाम पर ली गयी जमीन का कमर्शियल यूज का मेरा मामला अभी दीदी के यहाँ अटका पड़ा है।