विक्टोरिया मेमोरियलः यहां से चलती थी भारत पर हुकूमत

आखिरकार अंग्रेजों ने भारत में अपने राजपाट के केन्द्र के रूप में बंगाल को ही क्यों चुना ? दरअसल, उन दिनों बंगाल भारत का सबसे समृद्ध राज्य था। यहां के सिल्क और मसाले न केवल अंग्रेजों को लुभाते थे, बल्कि फ्रेन्च और पुर्तगीज भी इसके दीवाने थे। बंगाली सिल्क कारीगरों की तूती बोलती थी। ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए कम लागत में इससे बेहतर धंधा शायद ही कोई और होता। 18वीं सदी के मध्य तक बंगाल की आमदनी इतनी बढ़ गई कि अंग्रेज इसे अपने दूसरे कॉलोनीज में भी खर्च करने लगे। 1857 में ब्रिटिशराज की कुल आमदनी का 44 फीसदी हिस्सा सिर्फ बंगाल प्राप्त होता था। यह बंबई से 260 फीसदी अधिक था। ये आंकड़े गवाही देते हैं, कि बंगाल बेहद समृद्ध रहा है।

अब नए आंकड़े बताते हैं कि अगले वित्तीय वर्ष तक बंगाल के सिर पर 3 लाख 66 हजार करोड़ रुपए का कर्ज होगा। कभी मैनचेस्टर को टक्कर देने वाला बंगाल पाई-पाई को मोहताज है। हालात ऐसे रहे तो नई नौकरी तो छोड़िए, सरकारी नौकरी में भी छंटनी की नौबत आएगी। अगले साल तक।

बंगाल से अंग्रेज करीब 50 हजार से अधिक कारखानों को चलती हालत में छोड़ गए थे। मार्क्सवादी बंगाल से गए तो कारखानों को ताला लगाकर गए। अब ममता बनर्जी जाएंगी तो इन कारखानों का लोहा-लक्कड़ नीलाम कर जाएंगी। जो आएगा उसे सारी व्यवस्था नए सिरे से करनी होगी।

फोटोः महारानी विक्टोरिया का ऐतिहासिक महल। यहां से भारत पर अंग्रेजी हुकूमत चलती थी।

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बंगाल के लोग अपनी बुद्धिजीविता कहां खर्च कर देते हैं, इसकी कोई खबर है!

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