पुलवामा में आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का रोल


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जैश-ए-मुहम्मद पाकिस्तान की सरकार द्वारा पोषित-पालित एक ऐसा इस्लामिक जिहादी संगठन है, जिसका मुख्य उद्येश्य कश्मीर को भारत से अलग करना है। इसकी स्थापना वर्ष 2000 में मसूद अजहर नामक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी ने की थी। इससे पहले यह संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन के बैनर तले अपनी आतंकी गतिविधियां चला रहा था। वर्ष 1999 में कंधार हाईजैक से लेकर वर्ष 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में यह आतंकी संगठन सीधे तौर पर जुड़ा रहा है। यह संगठन कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्लाम के देओबंदी संस्करण का सहारा लेता है।

देओबंदी मदरसों में हैं जिहाद जड़ें

देओबंदी मदरसों में जैश-ए-मुहम्मद, लश्कर-ए-तोएबा और पाकिस्तान की सेना की कवायद के तहत सैकड़ों की संख्या में मुजाहिद तैयार किए जाते हैं, जिनमें अब कुछ आत्मघाती हमलावर भी बन रहे हैं। यही सच्चा इस्लाम है। पुलवामा में इसका एक बड़ा उदाहरण देखने को मिला है।

खतरनाक संकेत

पुलवामा आतंकी हमला न सिर्फ कश्मीर के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक खतरनाक संकेत है। सरकार द्वारा वित्तपोषित देओबंदी मदरसों की पौध पूरे देश में जहर की खेती कर रहे हैं और यह आने वाले दिनों में भारत को भारी पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि इन मदरसों पर अविलंब प्रतिंबंध लगाया जाए।


देवबंद से जैश के आतंकी गिरफ्तार! क्या आपको भी लगता है कि देओबंद में इस्लामिक आतंकवाद पलता है?