अब स्कूली पेपर के जरिए बच्चों के दिमाग में हिन्दू धर्म के खिलाफ भरा जा रहा है जहर

अक्सर चर्चा होती है कि हिन्दू पिछले 1400 सालों से अपनी सभ्यता और संस्कृति पर आक्रमण झेल रहे हैं और यह अब भी जारी है। यह शत-प्रतिशत सही है। कहने के लिए हम 1947 में आजाद देश हो गए, लेकिन यह सिर्फ किताबी बातें हैं। सर्वविदित है कि कश्मीर से लेकर केरल तक हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग आक्रमणकारियों के निशाने पर रहे हैं।

अब हिन्दुओं पर संस्थागत तरीके से हमले हो रहे हैं। इसका एक उदाहरण दिल्ली में छात्रों के लिए तैयार किया गया सोशल साइंस का पेपर है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि यह 9वीं कक्षा का है।

इस पेपर में लिखा है:

राम के देश में सभी फैसले राजा द्वारा लिए जाते हैं, जो लोगों के द्वारा चुना नहीं गया है।

इस पंक्ति का संदर्भ क्रमशः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से है। इस पेपर की मानें तो नरेन्द्र मोदी को जनता ने नहीं चुना है। क्या आपको भी ऐसा लगता है?

वहीं, पेपर में आगे कहा गया है:

सीता जी को गिरफ्तार हुए दो वर्ष हो गए, लेकिन आज तक उसे मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया।

एक अन्य स्थान पर लिखा है:

रहीम जी का संगठन सरकार की नीतियों के विरोध में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक धरना देना चाहता था, लेकिन इसकी इजाजत नहीं दी गई।

दिल्ली के विधायक कपिल मिश्रा ने ट्वीट के जरिए यह मामला उठाया है।

दिल्ली के सोशल साइंस का यह पेपर इस बात का सबूत है कि राजनीतिक क्षेत्र से लेकर शैक्षणिक क्षेत्र तक में संस्थागत तरीके से हिन्दुओं का दमन किया जा रहा है।

क्या आपको भी लगता है कि भारत में हिन्दू कहने भर के लिए बहुसंख्यक हैं?