बाबा और बलात्कार?


#1

जर्मनी से मोक्ष की तलाश में हरिद्वार पहुँची रैचेल को एक आश्रम में जगह मिल गई। बाबा जी का दर्शन केवल एक दिन हुआ और उसका नाम रामचेली रख दिया गया। आश्रम में प्रमुख सेविका के पास गांजे वाली सिगरेट थी, लेकिन रामचेली अखबार में किसी बाबा द्वारा बलात्कार की खबर पढ़ कर चिंतित हो गई। आश्रम में उसे समझाया गया की मोक्ष की तरफ बढ़ रही आत्मा को ऐसी ख़बरों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। व्यथित रामचेली घाट की तरफ आ गई जहां एक पानवाले की बातों में अध्यात्म की फिल्ड में भी वीआईपी देखा जाता है

उसे कुछ कुछ बोध होने लगा था। अब आगे की कथा –

रामचेली आश्रम में आ गई क्योंकि सायंकालीन आरती में शामिल होना सभी के लिए अनिवार्य था। आरती एक बड़े से हॉल में शुरू होने वाली थी, जहां तमाम चमकती मूर्तियाँ लगी हुई थीं और फर्श पर मखमली कालीन पड़ा हुआ था। चारों तरफ एक डिवाईन खुशबू फैली हुई थी। रामचेली के शरीर से अभी तक आश्रम गेट के बगल में बैठे भिखारियों की दुर्गन्ध लिपटी हुई थी, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो दूर देश से यहां आई और उसको रास्ता दिखाने के लिए बाबा जी तुरंत तैयार हो गए, में सारे लोग उससे कायदे से बात कर रहे हैं। सब के सब अध्यात्म में इतना डूबे हुए हैं कि लगता है स्वर्ग का दरवाज़ा इनके लिए ही खुलने वाला है, तो यहीं गेट पर इतने भिखारी कैसे बैठे हुए हैं। उनकी तरफ कोई देखता क्यों नहीं? तभी ढोल नगाड़े बजने लगे, शंख की लम्बी आवाज़ उसके कानों को चीरने लगी। ध्यान भिखारियों से हट गया। उसने इधर-उधर नज़र दौड़ाई बाबा जी आरती में नहीं थे, बगल वाले से पूछी की बाबा कहां हैं। बताया गया कि बाबा की पूजा अकेले में होती है और सम्मिलित आरती में तभी आते हैं, जब कोई बहुत बड़ा वीआईपी आता है।

अब रामचेली को आरती चुभने सी लगी, समझ में तो वैसे भी कुछ आ नहीं रहा था। अपनी मित्र बनी सेविका को देखने लगी पर वो भी हॉल में दिखी नहीं। रामचेली पूछना चाहती थी कि अध्यात्म की फिल्ड में भी वीआईपी देखा जाता है क्या। वो तो अपने देश में एक सुपर स्टोर में सफाई का काम फ़िलहाल करती थी, बढ़िया हुआ किसी को बताया नहीं, वरना न जाने क्या होता। उसका दम घुटने लगा, शायद वहां फैले सुगन्धित धुएं का असर था या अध्यात्म में वीआईपी का सोच कर, उसके जी किया कि बाहर चल कर भिखारियों के साथ बैठा जाए और गांजे वाली सिगरेट सुलगाई जाए। वो खिसकने लगी तो अगल-बगल आंखें बंद किए लोग उसे अजीब सी निगाह से देख कर मुस्कुराने लगे। एक महिला ने अपना आंचल ठीक करते हुए बगल वाले को, जो उसका पति रहा होगा कुहनी मारी और बोली की आरती में ध्यान लगाओ, ये अन्ग्रेजिन ऐसी ही होती हैं। राम चेली को ध्यान आया कि आज भी स्लीवलेस पहन ली थी जिससे बाहर भी बहुत लोगों की निगाहें अन्दर झांकने की कोशिश कर रही थीं।

रामचेली आरती से बाहर आ गई, किसी सेवक से अपने मित्र सेविका के बारे में पता किया, मालूम हुआ की वो इस वक्त बाबाजी के अन्तरंग कक्ष में उनकी सायंकालीन साधना में सहयोग करती हैं और वहां किसी दूसरे का प्रवेश वर्जित है। रामचेली अध्यात्म को समझने ही इण्डिया आई है, मोक्ष का रास्ता बाबाजी दिखाने वाले हैं, ऐसे में उत्सुकता बढ़ी और वह उस कक्ष की तरफ बढ़ चली। सेवकों ने जाने से मना किया तो बोली की बाबा जी ने आरती के समय बुलाया था, एक सेवक बोला की नई आई है, लगता है आज दीक्षा मिल जाएगी, जाओ।

कक्ष का दरवाज़ा चिपका हुआ था, अजीब सी आवाजें बाहर आ रही थीं। इसने सोचा कि कुछ मन्त्र पढ़े जा रहे होंगे और झटके से अन्दर घुस गई और देखा कि वो आवाज़ टीवी से आ रही थी। पहली बार इस कमरे में जहां दीवार पर लाल रंग का बड़ा पर्दा देखा था, आज वो हटा हुआ था और वहां बड़ी सी स्क्रीन पर उसी बाबा का समाचार चल रहा था, जिसकी खबर पढ़ कर ये बेचैन हो गई थी कि बाबा भी बलात्कारी होते हैं। इसको देख कर सेविका थोड़ी अचरज में पड़ गई और टीवी को स्विच ऑफ़ कर दिया, पूछा आरती में क्यों नहीं गई? यहाँ क्यों आई? बात करते-करते उसने पर्दा भी खींच दिया और टीवी गायब हो चुका था। अधलेटे, अधनंगे बाबा जी भी अपनी धोती ठीक करते हुए आसन पर बैठ गए।

रामचेली ने उनकी टो टचिंग की और वहीं कालीन पर बैठ गई, बैठने के साथ ही बाबा ने इसके सिर पर हाथ फेरा और स्नेह से पूछा – अभी तक कैसा लगा, आश्रम परिसर ही तुम्हे सब कुछ सिखा देगा, लेकिन कोई जिज्ञासा है तो बोलो बेटा? इतना प्यार पा कर भूखी रामचेली ने तुरंत पुछा – बाबा लोग भी बलात्कार करते हैं? एकाएक बाबा का चेहरा बदल गया, सेविका कुछ बोलने के लिए हुई तो बाबा ने उसको आदेश दिया कि जाए उनके हुक्के को जगा के ले आये और तमाखू के साथ थोड़ा ‘वो’ भी डाल दे। सेविका बाहर चली गई और अन्दर केवल बाबा और रामचेली रह गए और एक गंभीर सवाल की क्या बाबा लोग भी बलात्कार करते हैं!

बाबा ने कहा – एक विदेशी होने के नाते तुम्हारे इस सवाल को माफ़ किया जाता है, किसी भारतीय नारी के द्वारा कभी ऐसा बचकाना सवाल नहीं उठाया जाता क्योंकि उसे हमारे संस्कार पता हैं और देखो जिस खबर के चलते तुम व्यथित हो उसको बारीकी से समझो, आरोप लगाने वाली लड़की विक्षिप्त है। बापू को क्या पड़ी है किसी विक्षिप्त के साथ कुछ करने की जो बिचारी क्रिया में समुचित सहयोग ही न दे सके, जबकि करोड़ो लोग और लुगाइयां अपना सब कुछ लुटाने के लिए तैयार बैठे हैं। संत को बलात्कार की क्या आवश्यकता, मैं खुद में और तुम्हारे में कोई अंतर नहीं मानता, मोक्ष के मार्ग में हम एक हैं। इस क्रिया में हम देह नहीं, आत्मा हैं क्योंकि मोक्ष आत्मा का होता है।

राम चेली बाबा जी के करीब से खिसक कर दीवार के सहारे बैठ गई और बोली की पीठ में दर्द हो रहा है। तब तक सेविका हुक्का लेकर आ चुकी थी, बाबा जी खींचते जा रहे थे और उनका चेहरा अध्यात्म के प्रकोप से लाल होता जा रहा था। सेविका ने कहा – लेकिन बाबाजी, बापू को भागने की क्या जरुरत जबकि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं?

रामचेली – सत्य तो उस लड़की के साथ है, बापू तो भागेगा ही।

बाबा जी ने अपना हुक्का रामचेली की तरफ बढ़ाया, वो हिचकी लेकिन सेविका ने कहा कि प्रसाद है, किस्मत वालों को ही मिलता है।

रामचेली ने हुक्का पकड़ लिया, बाबा बोले — सद्विचार के साथ किया गया आचरण व्यभिचार नहीं हो सकता और बलात किसी से कुछ भी करने की अनुमति धर्म नहीं देता, ऐसा आचरण मुक्ति में बाधक है। तब तक हुक्के में पड़े प्रसाद का असर रामचेली पर होने लगा था, बाबा के अनमोल वचनों को सुन उसने झट से बोल दिया – बाबा आई लव यू, आप मेरे सब कुछ हैं, मैंने अपना सबकुछ आपको समर्पित किया।

बाबा ने सेविका को आदेश दिया कि आरती ख़तम होने के बाद होने वाले सत्संग की तैयारी के लिए वो खुद जाए और वहां सब कुछ व्यवस्थित करे और घोषणा करवा दे कि आज सत्संग में आधे घंटे बाद बाबाजी स्वयं उपस्थित रहेंगे। सेविका चली गई।

कुछ समय के रामचेली बाहर निकली और सेविका के पास पहुंची, सेविका ने प्यारी सी स्माईल दी और कहा कि अब तो पता चल गया होगा कि बाबाजी लोग को रेप करने की जरूरत नहीं, शंका समाधान तो हो गया होगा? मोक्ष का मार्ग बहुत सरल है, बस हम लोगों के साथ रहो, बहकना नहीं, बाबा जी का मार्ग ही सबसे अच्छा है। बाबाजी तैयार हैं सत्संग के लिए? रामचेली पर से प्रसाद का असर कम होने लगा था, बोली – हाँ जा के ले आओ, बार बार चैनल बदल रहे हैं ये देखने के लिए की बापू गिरफ्तार हुआ की नहीं और बोल रहे हैं कि इस देश में अब धर्म की बहुत हानि हो रही है, किसी दूसरे देश में शिफ्ट हो जाना चाहिए।

सेविका से बात करके रामचेली गेट की तरफ बढ़ी, सेविका ने पूछा की सत्संग में नहीं बैठेगी तो रामचेली बोली मेरा हो चुका है और बाहर निकल पड़ी। वो जाना चाहती थी, उसी पानवाले के पास जो कि इसे सही अर्थों में पहुँचा हुआ लगा था और उसे उन संतों के बारे में भी मालूम था जो बाज़ार से बाहर, एकांत में कहीं कुटिया बना कर रहते हैं।