मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए कोई और नहीं, बल्कि मुसलमान ही जिम्मेदार हैं!


#1

जुलाई 2018 में पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार बनी। सरकार बनते ही दिवालिया होने के कगार पर खड़े पाकिस्तान को आर्थिक रूप से संभालने के लिए इमरान खान ने तत्काल एक 18 सदस्यों वाली इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल बनाई जिसमें एक सदस्य आतिफ मियां भी थे। आतिफ मियां इस वक्त अमेरिका के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक हैं। आतिफ मियां ने कर्ज के बोझ से होनेवाले नुकसान पर एक किताब भी लिखी है और अर्थव्यस्था को माइक्रो इंडस्ट्री के जरिए संभालने के पक्षधर हैं।

जाहिर सी बात है आतिफ मियां के जो गुण हैं उसकी पाकिस्तान को इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन आतिफ मियां का नाम घोषित होते ही पाकिस्तान के सच्चे मुसलमानों ने विरोध शुरु कर दिया। सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मच गया। एक अहमदिया को इमरान खान इतनी महत्वपूर्ण पोस्ट कैसे दे सकते हैं? अहमदिया भले अपने आपको मुसलमान कहता रहे लेकिन है तो काफिर ही। एक काफिर को सरकार के उच्च पद पर कैसे बिठाया जा सकता है?

आतिफ मियां

पाकिस्तान सरकार में सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने सफाई भी दी कि ये इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल है, कोई इस्लामिक एडवाइजरी काउंसिल नहीं है, इसलिए इसका विरोध करना ठीक नहीं। लेकिन सुन्नतियों की सभा में उनकी कौन सुनता? आखिरकार इमरान खान को आतिफ मियां को काउंसिल से बाहर करना पड़ गया। होते रहें आतिफ मियां इकोनॉमी के जानकार, हो सकता है उनके पास पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबारने का फार्मूला भी हो लेकिन जो सुन्नती नहीं है उसका कोई फार्मूला स्वीकार नहीं है। भले ही वह मुसलमानों की भलाई का ही फार्मूला हो।

यह बात इसलिए लिख रहा हूं कि मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए कोई और नहीं खुद मुसलमान जिम्मेदार है। दुनिया में कोई नहीं है जो मुसलमान के खिलाफ है। यह तो सच्चा इस्लाम है जो मुसलमानों को दुनिया के खिलाफ खड़ा कर देता है। जिन मुसलमानों ने सच्चे इस्ताम में थोड़ी बहुत भी सांसारिक मिलावट कर ली है, वो इसी संसार में सुखी हैं। उनके लिए यही धरती जन्नत है, वरना सच्चे मुसलमानों ने धरती को जहन्नुम बनाने का प्लान तो बना ही रखा है।

संजय तिवारी के फेसबुक पेज से साभार।