आजम खान से आप शिष्टाचार की उम्मीद नहीं कर सकते, लेकिन चुनाव आयोग उस पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रहा?


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जिस राजनीतिक पार्टी के सर्वेसर्वा यह बयान दे चुके हैं कि ‘लड़कों से गलती हो जाती है’, उस पार्टी के नेताओं से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं? और अगर नेता आजम खान जैसा हो तो उससे सामान्य शिष्टाचार की अपेक्षा भी नहीं करनी चाहिए। चाहे साम्प्रदायिक टिप्पणी हो या फिर महिलाओं की इज्जत को उछालना, आजम खान ने हर बार यह साबित किया है कि वह भारतीय राजनीति के निकृष्ट और चिरकुट नेताओं में से एक है।

रविवार को आजम खान ने एक जनसभा के दौरान कहा था:

“जिसको हम ऊंगली पकड़कर रामपुर लाए, आपने 10 साल जिससे अपना प्रतिनिधित्व कराया… उनकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवियर खाकी रंग का है।”

खाकी अंडरवियर वाली टिप्पणी के बाद, कायदे से ऐसे व्यक्ति का सार्वजनिक जीवन से बहिष्कार किया जाना चाहिए। हालांकि, ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि मुसलमानों का एक बड़ा तबका आजम खान के साथ खड़ा है। इस बात की पुष्टि बॉलीवुड अभिनेता, फिल्मकार कमाल आर. खान कर रहे हैं।

अपने ट्वीट के जरिए कमाल कहते हैंः

“मैं कामना करता हूं कि आजम खान,असदुद्दीन ओवैसी और अबु आजमी जैसे राजनेता आगामी लोकसभा चुनाव हार जाएं. यह लोग अपने फायदे के लिए मुस्लिमों की छवि को खराब कर रहे हैं. दुर्भाग्य से गरीब मुस्लिम लोग इन नेताओं के ट्रिक को समझ नहीं पाते हैं।”

यह तय है कि आजम खान पर समाजवादी पार्टी कोई कार्रवाई नहीं करेगी, क्योंकि इस पार्टी का इतिहास ‘लड़कों से गलती हो जाती है’ वाला है।

फिलहाल इस टिप्पणी के लिए आजम खान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आजम खान हमेशा महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अशिष्ट रहा है। वैसे आश्चर्य इस बात का है कि चुनाव आयोग इस मामले का संज्ञान लेकर उसके चुनाव लड़ने पर रोक क्यों नहीं लगा रहा?